कई तालाबों को निगल गए अतिक्रमणकारी

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Encroachment swallowed several ponds

प्रशासन पर नहीं दिखा न्यायालय का असर

dhanajy tiwari
रीवा। जीवन में पानी की आवश्यकता सबसे अहम होती है। इसके लिये राजा-महाराजाओं के जमाने में ग्रामीण क्षेत्रों में कई दशक तालाबों का निर्माण कराया गया था। लेकिन स्थिति यह है कि अब तालाबों का वजूद ही मिट गया है। पुराने तालाबों से पशु पक्षियों को पीने के पानी के साथ ही स्वच्छ वातावरण को भी मदद मिलती थी। वर्तमान में हालात यह हो गये हैं कि धीरे-धीरे तालाबों का अस्तित्व में ही खत्म हो गया है। कुछ समाजसेवियों ने तालाब के संरक्षण को लेकर न्यायालय में याचिका दायर की थी जहां से प्रशासन को तालाबों का अतिक्रमण हटाये जाने के निर्देश दिये गये थे। वर्षों गुजर जाने के बाद भी प्रशासन द्वारा इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया। कई तालाबों पर भूमाफियाओं एवं राजस्व विभागों की सह पर भवन तन गये हैं।

Encroachment swallowed several ponds

भवन या फिर बना दिये मैदान
रीवा जिले के तालाबों पर अतिक्रमणकारियों की नजर लगी हुई है। विशालकाय तालाबों बस्तियों बस गयीं। कुछ स्थानों पर तालाब के अस्तित्व को मिटाकर वहां सरकारी भवन या फिर खेल के मैदान बना दिये गये हैं। लगातार तालाबों के अतिक्रमण के चलते जिले के कुछ समाजसेवी एवं अधिवक्ताओं ने तालाबों को बचाने के लिये मुहिम चलाई जिसके चलते स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक सहयोग न मिलने से न्यायालय में हस्ताक्षेप की मांग उठाई गई है। मामले को गंभीरता से हाइकोर्ट ने अतिक्रमण किये गये तालाबों को खाली कराये जाने प्रशासन को निर्देश भी दिये थे लेकिन उक्त निर्देश केवल औपचारिकता तक ही सीमित होकर रह गये।

नक्शे से गायब 1545 तालाब
जिला प्रशासन के आंकड़ों पर यदि नजर दौड़ाये तो जिले में संवत 1996 तक 1545 सार्वजनिक निस्तार के तालाब थे। वर्ष 2010 में इन तालाबों की संख्या और अधिक घट गयी तो वहीं 16 पहुंचते-पहुंचते तालाब अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। आलम यह है कि कुछ ग्रामीण इलाकों में नहरों के द्वारा पहुंचने वाले पानी से भले ही तालाब लबालब हो गये हों लेकिन स्थिति बद् से बद्तर है। एक आंकड़े के मुताबिक रीवा जिले के हुजूर तहसील में 189, रायपुर कर्चुलियान में 77, गुढ़ में 35, सिरमौर में 109, त्योंथर में 615, हनुमना में 116, मऊगंज में 234, मनगवां में 73, सेमरिया में 96 तालाब थे। उस दौरान बताया गया था कि रीवा जिले में 35 तालाबों में अतिक्रमण हुआ है और 21 तालाबों का निजी स्वामित्व में नामांतरण हो गया है। तालाबों के अस्तित्व को बचाने के लिये यह तर्क दिया गया था कि मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 248 के तहत कार्रवाई की जा रही है।

वर्तमान में क्या है स्थिति
जानकारी के अनुसार वर्ष 2014 में मान्नीय उच्च न्यायालय को प्रशासन द्वारा प्रतिवेदन भेजा गया था उसके मुताबिक रीवा जिले में 1137 तालाब बचे हैं। तहसीलवार दी गई जानकारी के अनुसार हुजूर तहसील में 97 तालाब बचे हैं। जिनका रकवा 511.676 है। इसी प्रकार रायपुर कर्चुलियान में 54 तालाब बचे जिनका रकवा 221.467, गुढ़ में 22 तालाब जिनका रकवा 81.481, सिरमौर में 61 तालाबों का रकवा 213.762, मनगवां के 130 तालाबों का रकवा 188.283, मऊगंज के 129 तालाबों का रकवा 417.739, नईगढ़ी के 93 तालाबों का रकवा 266.190, हनुमना के 104 तालाबों रकवा 235.198, त्योंथर के 207 तालाबों का रकवा 429.750 एवं जवा के 167 तालाबों का रकवा 353.290 बताया गया है। इस प्रकार जिले में कुल 1137 सार्वजनिक निस्तार के तालाब है जिनका रकवा 3180.025 है।