इलेक्शन मोड में शिक्षा मंत्री: चित्रकूट क्षेत्र की विद्यालयों के कायाकल्प के निर्देश

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Education Minister in Election Mode: Instructions for the Rejuvenation of Schools of Chitrakoot Area

rajesh dwivedi
सतना। चित्रकूट उपचुनाव में भगवा परचम लहराने के लिए भाजपा की तूफानी कवायदें जारी है। विगत दिवस मु यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के दो दिवसीय प्रवास के बाद मंगलवार को प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री कुंवर विजय शाह चित्रकूट पहुंचे और चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र की विद्यालयों में श्रेष्ठ शैक्षणिक सुविधाएं मुहैया कराने की रणनीति तैयार की। शिक्षा मंत्री विजय शाह की दिलचस्पी चित्रकूट विस क्षेत्र के विद्यालयो में रही और उन्होने बैठक के दौरान क्षेत्र की विद्यालयों की न केवल जानकारी ली बल्कि वहां व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। हालांकि बैठक में विद्यालयों से जुड़ी समस्याओं का अंबार सामने आया जिन्हें धैर्यपूर्वक सुनकर शिक्षा मंत्री ने अविलंब व्यवस्था दुरूस्तगी के निर्देश दिए। बैठक के दौरान एसडीएम एपी द्विवेदी, जिला शिक्षा अधिकारी भगवान सिंह देशलहरा, के अलावा डा. एमडी त्रिपाठी किटहा, दीपा सिंह मिचकुरिन, विनोद सिंह नयागांव, श्रीधर त्रिपाठी कामतन, शंकरदयाल त्रिपाठी, कन्या विद्यालय कामता , राजू पांडे रजौला, शंकर प्रजापति चौबेपुर समेत चित्रकूट क्षेत्र स्थित विद्यालयों के कई प्राचार्य व शिक्षक मौजूद रहे।

Education Minister in Election Mode: Instructions for the Rejuvenation of Schools of Chitrakoot Areaपालदेव विद्यालय को 1 करोड़, रजौला का जिक्र नहंी
सांसद आदर्श ग्राम योजना में चुने गए पालदेव के विद्यालय का कायाकल्प सांसद आदर्श ग्राम योजना से नहीं हो सका है । सांसद आदर्श ग्राम योजना की इसी विफलता को ढकने के लिए पालदेव विद्यालय के विकास के लिए एक करोड़ रूपए की राशि देने की घोषणा शिक्षा मंत्री ने की है। दिलचस्प बात यह रही कि पालदेव विद्यालय को तो 1 करोड़ दिए गए लेकिन भूमाफियाओं के कब्जे वाली रजौला विालय के बारे में जिक्र तक नहीं किया जबकि एक शिक्षक ने शिक्षा मंत्री को बताया कि रजौला विद्यालय परिसर में भूमाफिया कब्जा जमा रहे हैं। भाजपा का भगवा लबादा ओढ़कर भूमाफियाओं ने कई हेक्टेयर भूमि पर कब्जा जमा रखा है। मजे की बात यह है कि इस मामले में हाईकोर्ट ने भी अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे लेकिन अतिक्रमण भी नहीं हटाया जा सका है।

Education Minister in Election Mode: Instructions for the Rejuvenation of Schools of Chitrakoot Areaमझगवां-भटवा विद्यालय में बनेगी चारदीवारी
बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री ने कहा कि विद्यालयों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जाय और यह सुनिश्चित किया जाय कि हर विद्यालय में चारदीवारी हो। इसी दौरान उन्हें बताया गया कि मझगवां पुरानी बस्ती व भटवा स्थित विद्यालय में चारदीवारी नहीं है जिस पर शिक्षा मंत्री ने दोनों विद्यालयों में छात्रों बैठने की समुचित जगह व चारदीवारी बनाने के निर्देश दिए।

Education Minister in Election Mode: Instructions for the Rejuvenation of Schools of Chitrakoot Areaविद्यालयोंं में न पानी, न शौचालय
शिक्षकों ने बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री को बताया कि चित्रकूट क्षेत्र की अधिकांश स्कूलों में न तो छात्रों के लिए पानी की
व्यवस्था है और न ही शौचालय की, जिस पर शिक्षा मंत्री ने डीईओ की ओर सवालिया नजरों से देखा। शिक्षा मंत्री ने इस समस्या के सामने आने पर निर्देश दिए कि विद्यालयों में छात्रों की सुरक्षा व उन्हें मिलने वाली सविधाओं में यदि कोताही हुई तो ठोस कार्यवाही की जाएगी। शिक्षा मंत्री ने कहा कि हर प्रकार की सुविधा के लिए सरकार बजट दे रही है तो फिर ऐसी समस्या क्यों? उन्होने मौके पर ही डीईओ को निर्देश दिए कि यदि आगामी दिनों में इन समस्याओं को दूर किया जाय । यदि भविष्य में ऐसी शिकायत आई तो ब शा नहीं जाएगा।

शिक्षकों की टीम रखेगी नजर
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि पांच-पांच शिक्षकों की टीम बनाई जाय । शिक्ष मंत्री ने निर्देश दिए कि विद्यालय की व्यवस्थाओं व सुरक्षा को जांचने के लिए शिक्षकों की टीम गठित करें और निरीक्षण टीम की सिफारिशों पर अविलंब काम करें।

क्यों नहीं मिली पुस्तकें
बैठक के दौरान कई शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री कुंवर विजय शाह को बताया कि जिले के तकरीबन 22 हजार बच्चों को अब तक पाठ्यपुस्तकें नहीं मिल सकी हैं जबकि शैक्षणिक सत्र मध्य पर आ गया है। यह जानकारी पाकर भौचक्के हुए शिक्षा मंत्री ने वहीं बैठे जिला शिक्षा अधिकारी भगवान सिंह देशलहरा से पूंछा तो वे बगले झांकने लगे। हालांकि प्राथमिक व माध्यमिक स्तर की जि मेदारी न होने के कारण डीईओ ने इस मामले से पल्ला झाड़ा मगर जानकारों का कहना है कि मानीटरिंग का जि मा तो डीईओ का ही होता है। शिक्षा मंत्रत्री ने कहा कि अविलंब पुस्तकें मुहैया कराएं। व्यवस्था न बनें तो मुझे बताएं , मैं व्यवस्थ करूंगा।

इसलिए चरमराया गया पुस्तक वितरण का काम पर किसी ने नहीं खोला मुंह
दरअसल जिले में सरकार की पुस्तक वितरण योजना पर नेतागिरी भारी पड़ रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार पुस्तक वितरण की जि मेदारी निभाने वाले डीपीसी, शाखा प्रभारी रावेंद्र त्रिपाठी, प्रभारी डीपीसी एनके सिंह आदि पुस्तक वितरण के काम की मलाई चाटने नेताओं की शरण में रहते हैं। इसके पूर्व जिले में पुस्तक वितरण का टेंडर मामा-भांजे को दिया गया था। उस दौरान तो बाजार में पुस्तकें बेचने का मामला प्रकाश में आया था। बताया जाता है कि विवादित होने के बाद उसकी जगह पर भाजपा नेता गणेश द्विवेदी को टेंडर दिया गया लेकिन नेतागिरी की धौंस के आगे छात्रों के हित को उसने हासिए पर रख दिया । बताया जाता है कि जिन किताबों को प्रवेशत्सव के दौरान 16 जून को दिया जाना चाहिए था, वे किताबें अब तक नहीं दी जा सकी हैं। इस वस्तुसिथिति से शिक्षा मंत्री को जिला शिक्षाधिकारी द्वारा अवगत नहीं कराया गया और वे चुप्पी साधे रहे।

शिक्षामंत्री जी काश , डीईओ- डीपीसी का भ्रष्टाचार भी देखते
भला हो चित्रकूट उपचुनाव का जिसके कारण जिले में स्कूल शिक्षा मंत्री के तौर पर कुवर शाह ने पहली बैठक ली । बैठक
शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने और छात्र छात्राओं को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के दिशा निर्देश दिए गए लेकिन सवाल यह है कि क्या चित्रकूट में उपचुनाव नहीं होते तो भी क्या कुंवर शाह आते? आए भी तो ऐसा अहसास कराया मानों वे चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र के शिक्षा मंत्री हों। न तो उन्होने जिले के शिक्षा विभाग के पटरी से उतरने वजह जाननी चाही और नही यह जानने की कोशिश की कि डीईओ व डीपीसी ने किस प्रकार से भ्रष्ठ्राचार कर उन सुविधाओं को अपनी बांदी बना लिया है जो सुविधाएं सरकार छात्रों को देतीहै। ऐसे में उ मीद थी कि जिले में अपनी पहली बैठक कर रहे शिक्षा मंत्री कुंवर शाह जिला शिक्षा अधिकारी और प्रभारी डीपीसी एन.के.सिंह के भ्रष्टाचार पर भी नजर डालेंगे, लेकिन उनके निर्देशों में उपचुनावी गंध आ रही है।बंद छात्रावस में लाखों के र्ख करने का माला हो अथवा डीईओं भगवानदास देशलहरा द्वारा जूनियर रेडक्रास के खाते से 200000 रूपय व्यक्तिगत कार्यक्रम के लिए खर्च करने का मामला, तकरीबन सभी मामलों में डीईओ व डीपीसी की भूमिका यहां संदिग्ध रही है। ऐसे में शिक्षा मंत्री का पहला दौरा यहां उपचुनावी जमावट की भेंट चढ़ गया है। शिक्ष मंत्री के इस दौरे से शैक्षणिक व्यवस्था के पटरी पर लौटने का अनुमान लगाना ठीक वैसा ही है जैसा कि मुंगेरीलाल के हसीन सपने देखना।