दीक्षांत समारोह का मतलब शिक्षा का अंत नहीं होता: रामनाइक

0
32
Convocation is not the end of education: Ramayak
ram naik varanasi

राज्यपाल राम नाइक ने की संस्कृत विश्वविद्यालय के 35वें दीक्षांत समारोह में शिरकत

दीक्षांत समारोह में 28,395 को मिली उपाधियां, स्वामी सुबोधानंद को सर्वाधिक 9 पदक

सुरेश गांधी
वाराणसी। सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में रविवार को आयोजित 35वें दीक्षांत समारोह में 28,395 छात्र-छात्राओं को उपाधियां दी गईं। समारोह के मुख्य अतिथि सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय (गुजरात) के कुलपति डॉ. अर्कनाथ चैधरी थे। अध्यक्षता कुलाधिपति व राज्यपाल राम नाईक ने की। समारोह में 33 मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। शांकरवेदांताचार्य परीक्षा में सर्वाधिक अंक हासिल करने वाले स्वामी सुबोधानंद को सर्वाधिक नौ पदक मिला। इनमें आठ स्वर्ण और एक रजत पदक शामिल है। इसके अलावा अमेरिकी नागरिक एलियट हांकर को संस्कृत प्रमाणपत्रीय परीक्षा में सर्वोच्च अंक हासिल करने के लिए कांस्य पदक से सम्मानित किया गया।

Convocation is not the end of education: Ramayak
ram naik varanasi

इस मौके पर राज्यपाल ने छात्र-छात्राओं से कहा कि दीक्षांत को शिक्षांत समारोह न समझें। यह शिक्षा का अंत नहीं है, बल्कि यहां से तो जिंदगी की कसौटी शुरू होती है। यानी किताबी अध्ययन का समय पूरा हो चुका है। अब संघर्ष करने का समय आ गया है। जीवन के हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। इसके लिए गुरुओं ने जो ताकत दी है, उसका उपयोग करें। वर्तमान में परिवेश की आवश्यकता है कि शिक्षा में गुणवत्ता के साथ-साथ अनुसंधान में भी बढ़ोत्तरी हो। जिसमें संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय अग्रणी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के संस्कृत विश्वविद्यालयों में से यह सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय में से एक है। उपाधि एवं पदक प्राप्त छात्र-छात्राएं अपना दायित्व का निर्वहन करें, कभी भी कितनी भी मुश्किल घड़ी हो हिम्मत कतई न हारे सफलता स्वयं आपके कदम चूमेगी। क्योंकि सफलता की राह बड़ी ही चुनौतीपूर्ण होती है और जो इन चुनौतियों का डटकर सामना करता हैं वह कभी असफल नहीं होता। युवाओं को सफलता का मंत्र देते हुए उन्होंने कहा कि एक जिद जुनून होना जरूरी है तभी हमें अपने क्षेत्र में सफलता मिलेगी और याद रखें सफलता पाना है तो हमें एकजुट रहना होगा क्योंकि एकता में ही शक्ति है।

पीढ़ी की दशा और दिशा सुधारने के लिए सभी को साथ आना होगा तभी सफलता मिलेगी। उन्होंने बताया कि युवा शाक्ति में हमारा देश सबसे आगे है 130 करोड़ में से 62 प्रतिशत से अधिक हिस्सा 15 से 30 वर्ष के युवाओं का है। साथ ही उन्होंने अभिभावकों से कहा कि बच्चों को डाक्टर, इंजीनियर हेतु बाध्य न करें। उनकी रूचि को ध्यान में रखते हुए व्यक्तित्व निर्माण में प्रोत्साहित करें। इसके साथ ही उन्होंने गुणवत्ता आधारित शिक्षा प्रदान करने पर जोर दिया। मुख्य अतिथि प्रो. अर्कनाथ चैधरी ने संस्कृत के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। ज्ञान की कोई ऐसी शाखा नहीं है, जिसका जिक्र संस्कृत में न मिलता हो।

उन्होंने 45 मिनट तक संस्कृत में धाराप्रवाह भाषण दिया। उनके भाषण के दौरान कई बार हर-हर महादेव का उद्घोष हुआ। आरंभ में कुलपति प्रो. यदुनाथ दुबे ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी और कुलसचिव प्रभाष द्विवेदी ने किया। समारोह में काशी विद्यापीठ के कुलपति डॉ. पी. नाग के अलावा कई संस्कृत महाविद्यालयों के प्राचार्य और गणमान्य नागरिक मौजूद थे। दीक्षांत समारोह के बाद मीडिया से बातचीत में राज्यपाल रामनाइक ने प्रस्तावित विधेयक यूपीकोका का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में मकोका का अच्छा असर रहा है। तीन तलाक पर बनाए जा रहे कानून के बारे में उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण के लिए यह जरूरी है। राज्यपाल ने बताया कि जनवरी में उनकी पुस्तक ‘चरैवेती-चरैवेती’ के संस्कृत अनुवाद का लोकार्पण वाराणसी में ही होगा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद लोकार्पण कराने की योजना है।