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बेरछा रोड की बदहाली राहगीरों के लिए बनी मुसीबत, नाले के गंदे पानी से मार्ग तालाब में हुआ तब्दील

Civil Surgeon's Depression Can not Buy New Resources in Hospital

नाले के गंदे पानी से मार्ग तालाब में हुआ तब्दील

amjad khan
शाजापुर। नाले का गंदा पानी जमा होने से बेरछा रोड तालाब के रूप में तब्दील होकर राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते रोड पर हो रहे भारी गड्ढों में जमा पानी लगातार लोगों के लिए कठिनाई खड़ी कर रहा है। वहीं इसमें वाहनों के फंस जाने से यातायात व्यवस्था भी बाधित हो रही है, लेकिन इसके बाद भी वर्षों से लोगों के लिए असुविधा का कारण बनने वाली समस्या को जिम्मेदारों द्वारा हल नही किया जा सका है। ज्ञातव्य है कि बेरछा रोड की बदहाली को लेकर तत्कालीन कलेक्टर श्रीमती अलका श्रीवास्तव ने अधिकारियों को निर्देशित किया था कि वे समस्या को जल्द ही हल करें, परंतु जिम्मेदारों ने कलेक्टर के आदेश को हवा में उड़ा दिया और इसीके चलते समस्या जस की तस बनी हुई है। उल्लेखनीय है कि बदहाल बेरछा रोड की करोड़ों रुपए खर्च कर दशा सुधारी गई है, किंतु टंकी चौराहा से कुछ दूरी पर रेलवे पुलिया के नीचे वाले हिस्से का नव निर्माण नही किया गया है, जिसके कारण 30 फीट लंबे सड़क के इस टूकड़े पर 15 फीट चौड़े और ढाई फीट गहरे गड्ढे लोगों को परेशान करने का काम कर रहे हैं।

Civil Surgeon's Depression Can not Buy New Resources in Hospitalगौरतलब है कि बेरछा रोड की बदहाल हालत की वजह से आम से लेकर खास तक सभी परेशान हैं। वहीं सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। क्योंकि उक्त मार्ग से होकर प्रतिदिन बच्चों को स्कूल जाना पड़ता है और इस कारण उन्हे भारी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। बेरछा रोड पर रेलवे अंडरब्रीज के नीचे पानी जमा होने की इस समस्या को लेकर 12 जून 2017 को तत्कालीन कलेक्टर श्रीमती अलका श्रीवास्तव ने नाराजी जाहिर की थी। साथ ही रेल्वे एवं मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से कहा था कि ब्रिज के नीचे पानी भरने की संभावना है इससे शाजापुर से बेरछा रोड का आवागमन बंद होने के साथ ही किसी भी प्रकार की दुर्घटना हो सकती है। Civil Surgeon's Depression Can not Buy New Resources in Hospitalइसलिए दोनों विभाग सुनिश्चित करें कि कौन यहां से पानी निकासी का इंतजाम करेगा। कलेक्टर ने रेलवे के सहायक संभागीय यंत्री जेबी गुप्ता तथा एमपीआरडीसी के सहायक महाप्रबंधक आशीष पाठक को निर्देश दिए थे कि समस्या को हल करने के लिए तत्काल कार्रवाई की जाए, लेकिन जिम्मेदारों ने कलेक्टर के निर्देशों को ताख में रख दिया और इसी कारण एक माह बाद भी समस्या को हल नही किया गया है।

ajay dwivedi
the authorajay dwivedi