खुले मैदान में दिया बच्चे को जन्म

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Child born in open ground

तमाम प्रयासो के बाबजूद भी नही सुधर रही अस्पताल की व्यवस्थाएं

asish malviya
अशोकनगर। जिला चिकित्सालय में प्रसूति वार्ड का बुरा हाल हैए वहीं रही सही कसर इस विभाग का स्टॉफ और प्रसूता को प्रसूति वार्ड तक लाने और ले जाने के लिए शुरु की गई शासन की महत्ती योजना जननी एक्सप्रेस की लचर व्यवस्थाएं पूरी कर देती है। कई मर्तव्या तो प्रसव के मामलो में जच्चा और बच्चा की जान पर बन आ चुकी है। इसके अलावा कई बार तो मासूमो की जान तक चली गई है। बाबजूद इसके अभी तक व्यवस्थाए जस की तस बनी हुई है।

Child born in open groundऐसा ही एक मामला सोमवार की सुबह देखने को मिला जिसमें ग्राम जंघार निवासी प्रीति पत्नि सुनील जाटव को उसके परिजन प्रसव हेतु ईसागढ़ सामुदायिक सवास्थ्य केंद्र पहुंचे जहां उसे जिला चिकित्सालय रैफर कर दिया गया। जब परिजन प्रीति को लेकर जिलाअस्पताल आए तो यहा मौजूद स्टॉफ ने उसकी जांच कर मामले को जटिल बताया और डिलेवरी हेतु भोपाल ले जाने को कहा। चिकित्सकिय स्टॉफ की बात मानकर प्रीति के साथ आई महिलाए उसे लेकर अस्पताल परिसर में बैठी घर के अन्य लोगो का इंतजार कर रहीं थी। इसी बीच प्रीति को तीव्र प्रसव पीड़ा शुरु हो गई और खुले मैदान में ही महिला की डिलेवरी हो गई। जहां उसने एक बेटे को जन्म दिया। जानकारी लगने पर ड्यूटी नर्स तत्काल पहुंची और जच्चा बच्चा का प्राथमिक उपचार कर उन्हे भर्ती किया गया। जहांंंंं प्रीति को प्रसूती वार्ड ले जाया गया तो वही बच्चे को एसएनसीयू में भेजा गया।

आखिर क्यो किया भोपाल रैफ र:- दरअसल यह पहला मौका नही है जब किसी प्रसूता के साथ इस तरह का व्यवहार हुआ होए यहा प्रश्न यह उठता है कि ड्यूटी पर मौजूद स्टॉफ ने जब प्रीति को भोपाल रैफ र कर दिया तो उसके महत एक से डेढ घंटे के अंदर उसे प्रसव हो गया। ऐसे में यदि प्रीति के परिजन उसे भोपाल भी ले जाते तो भोपाल तक का रास्ता तकरीबन तीन घंटे में तय हो पाता और साफ जाहिर की प्रीति को रास्ते में ही प्रसव हो जाता। ऐसे में क्या महिला चिकित्सक या नर्सो ने इतना अंदाजा नही लगाया कि प्रीति को प्रसव हेतु कितना समय लगेगा। ऐसे में यदि केश बिगड़ जाता है तो उसका जिम्मेदार कौन होता।

जिम्मेदारी से भागते है चिकित्सक:- जिला चिकित्सालय में अक्सर यह देखने में आता है कि चिकित्सक अपनी जिम्मेदारी से बचकर या तो ड्यूटी समय से पहले चले जाते है या लेट अस्पताल पहुंचते है। वहीं कई मर्तबा साधारण मरीजो को भी गुना या भोपाल रैफ र कर दिया जाता है। ऐसे में गरीब मरीजो या ग्रामीण अथवा दूर दराज क्षेत्रों से आए लोगो को बेमतलब ही परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसा ही कुछ इस मामले में देखा गया।

ऑपरेशन के बहाने भेजते है निजी नर्सिग होम:- कई बार ऐसा देखने में आया है कि डिलेवरी हेतु प्रसूता को पहले ऑपरेशन और केश कांपलिकेटेड होने की बात कहकर निजी नर्सिग होम भेजे जाने की सलाह दी जाती है। सूत्रो की माने तो कमीशन कमाने के चलते ऐसा किया जाता है ऐसे मामलो में कई बार मरीज और उनके परिजन एक लंबी राशि से हाथ धो बैठते है। वहीं कई बार ऐसा भी देखने को मिला कि जिस महिला को डिलेवरी में ऑपरेशन की बात कहीं जाती है उसे नॉर्मल डिलेवरी होती देखी गई है।