भर्राशाही की भेंट चढ़ा जिला अस्पताल का सखी सेंटर

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उद्घाटन के दो दिन बाद से ही लटका है ताला, सुविधाएं नदारद

Brrashahi Sakhi center of the district hospital, and offer themajay tripathi
कटनी। जहां एक ओर जिला अस्पताल में पदस्थ अमले की लापरवाही के कारण शासन के दिशा निर्देश हवा-हवाई होकर रह गए हैं जहां सुविधाओं के नाम पर शुरूआत तो कर दी जाती है लेकिन उसके बाद भर्राशाही की परंपरा सुविधाओं पर भारी पडऩे लगती है। जिला अस्पताल में बीते दिनों शुरू किया गया सखी सेंटर भी लापरवाही की भेंट चढ़ गया है जहां निर्देशों को बलाय ताक रख दिया गया है और अधिकांशत: सेेंटर में ताला ही लगा रहता है।



हवा-हवाई हुए 24 घंटे सुविधा देने के निर्देश
देखने में आ रहा है कि समय-समय पर कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा जिला चिकित्सालय का निरीक्षण किया जाता है और इस दौरान व्यवस्थाओं में सुधार के लिए निर्देश भी दिए जाते हैं लेकिन जिला चिकित्सालय प्रबंधन द्वारा इन निर्देशों पर कोई अमल नहीं किया जाता। ऐसा ही हाल सखी सेंटर का है जहां महिलाओं के लिए 24 घंटे सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश तो हैं लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते सेंटर सुविधा देने में असमर्थ नजर आ रहा है।
निर्देशों पर भारी लापरवाही
गौरतलब है कि ऊषा किरण संस्था व महिला सशक्तीकरण विभाग के द्वारा हिंसा से पीडि़त महिलाओं और बालिकाओं को आश्रय प्रदान करने, चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराए जाने, पुलिस सहायता उपलब्ध कराए जाने, कानूनी सहायता परामर्श आदि की सुविधा उपलब्ध कराए जाने के उद्देश्य से वन स्टॉप सेंटर सखी को शुभारंभ किया गया था जो भर्राशाही का शिकार हो चुका है।
लगा रहता है ताला, नहीं पहुंच रहीं शिकायतें
आलम यह है कि उद्घाटन के दो दिन बाद से ही सखी सेंटर में ताला नजर आने लगा है। न तो अभी तक कोई महिला या बालिका इस सेंटर में अब तक किसी हिंसा की शिकायत करने पहुंची है। जबकि इस सेंटर में महिलाओं के लिए 24 घंटे सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। जिला अस्पताल में परंपरागत रूप से व्याप्त भर्राशाही पर अंकुश लगा पाने में जिम्मेदार अधिकारी वर्ग असहाय क्यों साबित हो रहे हैं यह समझ से परे है।



शो-पीस बनकर रह गया सखी सेंटर
जिला अस्पताल का सखी सेंटर में सिर्फ शो-पीस बनकर रह गया है यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी। सखी सेंटर के उद्घाटन के दो दिन बाद ही सेंटर में ताला लगे होने के कारण ना ही कोई महिला कर्मचारी यहां किसी हिंसा पीडि़त महिला के पहुंचने पर शिकायत दर्ज कराने इस सेंटर में नजर आती है और न ही कार्यालय खुलने पर कोई कर्मचारी यहां उपलब्ध रहता, जो किसी प्रकार की शिकायत दर्ज करने यहां उपस्थित हो।