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आदि उत्सव के औचित्य पर आदिवासी महापंचायत ने उठाये सवाल

मोती महल को संरक्षित श्रेणी से बाहर करने पर आक्रोश

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आदि उत्सव के औचित्य पर आदिवासी महापंचायत ने उठाये सवाल

मोती महल को संरक्षित श्रेणी से बाहर करने पर आक्रोश

2015 एवं 2016 में की गई घोषणाएं नहीं हुई पूरी…

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Syed Javed Ali
मण्डला – आदिवासी समाज संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के लिए जिले में वर्ष 2015 से आदि उत्सव का आयोजन शासन स्तर से किया जा रहा है। जिसमें शामिल होने वाले जनप्रतिनिधि मंच से आदिवासी संस्कृति के संरक्षण संवर्धन की बात तो करते हैं पर जमीनी हालात बिल्कुल उनके विपरीत होते हैं। आदिवासी समाज को झूठी घोषणाओं और वादों के माध्यम से पिछले तीन साल से गुमराह करने का काम आदि उत्सव में किया जा रहा है। इस बार तो अति की चरम सीमा भी पार की जा रही है, जिस आदिवासी विरासत को सहेजने संवारने और संरक्षित रखने की बात की जाती है उसी आदिवासी विरासत को सरकार ने संरक्षित श्रेणी से हटाते हुए आदिवासी समाज को धोखा देने का काम किया है।

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शुक्रवार को जिला मुख्यालय में आयोजित एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए आदिवासी महापंचायत के संरक्षक डाॅ. अशोक मर्सकोले, संयोजक भूपेन्द्र वरकड़े व पूर्व विधायक नारायण सिंह पटटा ने बताया कि म.प्र. सरकार के द्वारा रामनगर स्थित गोंड़कालीन विरासत मोती महल को संरक्षित श्रेणी से हटाने की कार्यवाही का प्रकाशन मध्यप्रदेश राजपत्र में किया है। इस आदेश के अनुसार रामनगर का मोतीमहल अब शासन द्वारा संरक्षित नहीं किया जाएगा और न ही संरक्षित स्मारकों से जुड़े नियम कानून अब इसमें लागू होंगे। एक प्रकार से यह ऐतिहासिक विरासत अब लावारिस छोड़ दी जाएगी। सबसे हास्यस्पद तथ्य तो यह है कि इसी गौंडकालीन विरासत के नाम पर और इसी के सामने आगामी 24 अप्रैल से आदि उत्सव का आयोजन किया जा रहा है जिसमें देश के प्रधानमंत्री का भी आगमन हो रहा है। एक तरफ आदिवासी विरासत को संरक्षित श्रेणी के हटाने का काम किया गया है और दूसरी तरफ उसी विरासत और संस्कृति के नाम पर आदि उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। आदिवासी समाज को धोखा देने और संस्कृति का आघात पहुंचाने वाले इस कृत्य की जितनी भी निंदा की जाये कम है। आदिवासी महापंचायत इस विषय को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराएगा और जरूरत पड़ी तो आंदोलन का रास्ता भी चुना जाएगा।

आदिवासी महापंचायत का कहना है कि वर्ष 2015 के आदि उत्सव में केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम ने 16 अप्रैल को शुभारम्भ कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति के संरक्षण संवर्धन हेतु जो घोषणाएं की थी वो आजतक पूरी नही हो पाई हैं। केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की थी कि आदिवासी संस्कृति के विकास व विस्तार के लिए 4 करोड़ रुपये की राशि दी जाएगी जिससे चैगान में आदिवासी संस्कृति आधारित संग्रहालय सामुदायिक भवन का निर्माण किया जाएगा साथ ही 1 करोड़ की राशि नवरत्न विद्यालय के निर्माण के लिए दी जाएगी लेकिन तीन साल बीतने के बाद भी न तो राशि मिली और न ही कोई काम किया गया है। वही उन्होंने यह भी कहा था कि कक्षा सातवीं तक की पढ़ाई स्थानीय भाषा मे कराए जाने की योजना पर काम चल रहा है पर तीन साल बीतने के बाद भी इस पर कोई निष्कर्ष नही निकल पाया है और न ही कोई घोषणा पूरी हुई है।

आदिवासी महापंचायत ने बताया कि वर्ष 2016 के आदि उत्सव में प्रदेश के मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि काला पहाड़ तक सड़क के लिए 1 करोड़ 22 लाख रुपये दिए जाएंगे, चैगान में पेयजल सुविधा के लिए 65 लाख रुपये दिए जाएंगे, गौंड टूरिज्म सर्किल विकसित किया जाएगा, गौंड राजा शंकर शाह के नाम पर कल्याणकारी योजना शुरू होगी, मंडलियों को 11-11 हजार रू की राशि मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से दी जाएगी। इन सभी घोषणाओं में से एक भी घोषणा पूरी नहीं की गई है दो साल बीतने के बाद मुख्यमंत्री फिर से आदि उत्सव के कार्यक्रम में आ रहे हैं उन्हें अपनी झूठी घोषणाओं के लिए आदिवासी समाज से माफी मांगनी चाहिए और रामनगर के मोती महल को संरक्षित श्रेणी से बाहर करने के लिए आदिवासी समाज को कारण बताना चाहिए साथ ही यह भी कहना चाहिए कि उन्होंने आदिवासी समाज को धोखा देने का काम किया है।

आदिवासी महापंचायत ने कहा कि 24 अप्रैल को रामनगर में आदि उत्सव का आयोजन फिर किसी झूठी घोषणा के लिए तो नहीं किया जा रहा है यह भी बताना चाहिए। बीते दिनों महापंचायत ने जनजातीय कार्य विभाग में किये गए व हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर अपना विरोध दर्ज कराते हुए बहिष्कार का संदेश भी दिया था परंतु अब तो आदिवासी विरासत और आदिवासी समाज के साथ शासन द्वारा अपनाए जा रहे दोहरे मापदण्ड प्रमाण सहित सामने आये हैं ऐसी स्थिति में आदि उत्सव के आयोजन पर यह सवाल उठना लाजमी है कि ‘‘क्या यह आदि उत्सव ऐतिहासिक आदिवासी विरासत को संरक्षित श्रेणी से बाहर करने के लिए मनाया जा रहा है ? आदिवासी महापंचायत ने जिम्मेदारों से अपने सवालों के जबाब भी मांगे है।

ajay dwivedi
the authorajay dwivedi