हमारे बारे में

ajay dwivedi
ajay dwivedi

सूचना तकनीक के दौर में यह चलन आम है और जो गलत भी नहीं है की हर मीडिया हाउस इंटरनेट से पाठकों को अपने पत्र पत्रिका का वेब-संस्करण भी उपलब्ध करा रहा है। यह सही है की अभी देश की कुल आबादी का दस फीसदी हिस्सा ही अपने देश में इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन भविष्य को इन्टरनेट के बिना विकास की मुख्य धारा से जोड़ पाना संभव नहीं होगा पायेगा । जहाँ एक ओर पिन से लेकर प्लेन तक कम्प्यूटर तकनीक से संचालित हो रहे है वहीं मीडिया का भी स्वरुप बदला है और हाईपर मीडिया के रूप में वेब पत्रकारिता ने समाचारों सूचनाओं को त्वरित प्रकाशन प्रसारण का एक नया मंच दिया है जो तेजी से फैल रहा है जिसकी परिणिति है की आज हर छोटे-बड़े मीडिया हाउस एवं समाचार प्रकाशकों ने इन्टरनेट के माध्यम से वेब पोर्टल पर खबरों का प्रकाशन प्रसारण कर इन्टरनेट युजरों से नजदीकी बढ़ाना शुरू कर दिया है। भवतारिणी पत्रिका के माध्यम से भी इंटरनेट यूजरों से सीधा रिश्ता बनाने का हमारा प्रयास है। उद्देश्य भी यही है की हम अपने पाठकों को देश-दुनिया की ताजा-तरीन खबरों से अवगत कराए । मीडिया आखिर लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। यह न केवल समाज को सूचनाएं देता है। बल्कि उन सूचनाओं के भीतर के सच का विश्लेषण भी करता है। ताकि पाठक घटनाओं के सभी पहलुओं को समझ सकें और फिर अपने विवेक के अनुसार निश्चित कर सकें की सही क्या है और गलत क्या है। विश्वास है की हमारा यह प्रयास हमारे सुधि पाठकों को पसंद आएगा।

एक बात और। हम आपको वह सच बताने जा रहे हैं, जो कोई पत्र पत्रिका या वेबसाइट नहीं बताती। हमारा पहला उद्देश्य समाज को सूचना देना तो है ही, लेकिन इसका दूसरा उद्देश्य यह भी है की हम और हमारे जो साथी भवतारिणी पत्रिका और बेबसाइट से जुड़े हैं उनके खर्चे इससे चलते रहें। उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी हो, ताकि वे समाज में अपना जीवन सम्मानजनक तरीके से जी सके उन्हें पीत-पत्रकारिता करने की आवश्यकता न पड़े। दाल-रोटी हम भी खाते हैं। घर-परिवार हमारा भी है। तो हम यह दावा कैसे कर सकते हैं की हमारी वेबसाइट सिर्फ और सिर्फ क्रांति करने के लिए ही अस्तित्व में आई है। हमारे मन में विचार तभी आते हैं, कोई भी क्रांति भी तब ही होती है जब हमारा पेट भरा हुआ हो। जो लोग दावा करते है की वे सिर्फ क्रांति करने के लिए ही मीडिया के क्षेत्र में आए हैं। उनका यह दावा झूठा है। यदि यह दावा सही है। तो फिर समाज में पत्रकारिता के नाम पर दलालों की एक फौज कैसे खड़ी हो गई है। कुछ पत्रकार इस या उस राजनीति पार्टी, इस या उस नेता के भोंपू क्यों बने फिरते हैं। हम यह सब बातें इसलिए कर रहे हैं। क्योकिं हमें साफगोई पसंद है। उम्मीद है की हमारी यह साफगोई हमारे विद्वान पाठकों को भी पसंद आएगी। भवतारिणी पत्रिका और वेबसाइट की पहचान उसकी साफगोई से ही होगी, ऐसा हमारा विश्वास है। अलबत्ता इंटरनेट के महासागर में हमारी यह वेबसाइट पानी की एक बूंद जैसी ही है। पर हम आपको भरोसा दिलाते हैं की हम सच को आपके सामने वैसे ही पेश करेंगे जैसा की वह है।
आपके सहयोग और सुझावों की प्रतीक्षा में।

आपका
अजय द्विवेदी
प्रधान संपादक