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मध्यप्रदेश में 2 हजार 625 हेक्टेयर में विकसित किये जा रहे 9 औद्योगिक क्षेत्र

इंडियन बिजनेस सेमीनार पुर्तगाल के पोर्टो में उद्योग मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल

भोपाल : वाणिज्य, उद्योग एवं रोजगार मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने आज पुर्तगाल के पोर्टो में एम.पी. इंडियन बिजनेस सेमीनार को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश उद्योगपतियों की पसंद का राज्य बन गया है। यहां 2 हजार 625 हेक्टेयर क्षेत्र में 9 औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। उन्होनें कहा कि मध्यप्रदेश में आज औद्योगिक उपयोग के लिए एक लाख 20 हजार हेक्टेयर जमीन मौजूद है जिसमें 40 हजार एकड़ विकसित भूमि है। जमीन आवंटित करने की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है। इस मौके पर भारतीय एम्बेसडर पुर्तगाल श्रीमती के. नंदिनी सिंगले, पोर्टो की मेयर सुश्री रूई मोरेरिया, मध्यप्रदेश ट्रायफेक के प्रबंध संचालक श्री डी.पी. आहूजा सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

9 industrial areas being developed in 2,625 hectares in Madhya Pradeshश्री शुक्ल ने कहा कि नर्मदा नदी का 900 एमसीएम पानी औद्योगिक उपयोग के लिए आरक्षित किया गया है। प्रदेश बिजली के मामले में सरप्लस है, यहां 24 घंटे बिजली उपलब्ध है। रेल, रोड़ और वायुमार्ग से मध्यप्रदेश की कनेक्टिविटी बहुत अच्छी है। देश के सभी शहरों से इसकी दूरी लगभग समान है। प्रदेश में समुद्र नहीं है लेकिन इसकी प्रतिपूर्ति के रूप में हमने छह इग्लैंड कंटेनर डिपो बनाए है। जिससे जल आधारित परिवहन और निर्यात उन्मुखी उद्योगों को सुविधा हो रही हैं।

उद्योग मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश पारंपरिक रूप से कृषि प्रधान राज्य है, जहाँ बीते एक दशक से कृषि विकास दर औसत लगभग 20 प्रतिशत रही है। कृषि के क्षेत्र में अपनी श्रेष्ठ उपलब्धियों के फलस्वरूप प्रदेश को भारत सरकार से पाँच बार प्रतिष्ठित “कृषि कर्मण अवार्ड’’ प्राप्त हो चुका है। अब प्रदेश में बहुत संतुलित कृषि-औद्योगिक अर्थ-व्यवस्था को विकसित करने पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश की अच्छी नीतियों के कारण मध्यप्रदेश में विश्व स्तर के राष्ट्रीय और अंर्तराष्ट्रीय निवेशकों ने निवेश करके बहुत लाभ प्राप्त किया है। प्रदेश में निवेशकों के अनुकूल वातावरण बनाया है। इसका प्रमाण यह है कि मध्यप्रदेश भारत के उन 5 राज्यों में शामिल है जहां बीते 5 वर्ष में सबसे ज्यादा निवेश हुआ है।

उद्योग मंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों से जुड़े ज्यादातर कार्यों को ऑटोमेटेड किया गया है। यह सुनिश्चित किया गया है कि इस कार्य में मानवीय हस्ताक्षेप कम से कम हो। सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया गया है। विश्व बैंक और भारत सरकार द्वारा की गई रेंकिंग में “ईज ऑफ डूइंग’’ बिजनेस के मामले में मध्यप्रदेश वर्ष 2016 में देश में 5वीं पोजीशन में रहा। प्रक्रियाओं को और सरल बनाने के लिए इनवेस्ट एमपी पोर्टल तैयार किया जा रहा है। इससे निवेशकों और उद्यमियों को उद्योग और व्यवसाय संबंधी काम करने में ज्यादा आसानी होगी।

उद्योग मंत्री श्री शुक्ल ने सेमिनार में जानकारी दी कि सरकार द्वारा उद्योगपतियों के प्रोत्साहन के रूप में दी जाने वाली राशि ऑनलाइन सिस्टम से सीधे उनके खातों में उसी वित्तीय वर्ष में ट्रांसफर हो जाती है। पिछले वित्तीय वर्ष में 1200 करोड़ रुपए की राशि उद्योगों को प्रोत्साहन के रूप में वितरित की गई। श्री शुक्ल ने कहा कि पिछली कर व्यवस्था में वेट और सीएसटी की प्रतिपूर्ति की जाती थी। जीएसटी कर व्यवस्था में निवेश सहायता को कर संग्रहण से पूरी तरह अलग कर दिया गया है। नई संशोधित औद्योगिक निवेश नीति के अनुसार 35 मीलियन ईयूआर का लाभ उठाया जा सकता है। पिछले वर्ष अक्टूबर में ग्लोबल इन्वेस्‍टर्स समिट में प्राप्त प्रस्तावों में से 1.1 लाख करोड़ के निवेश का क्रियान्वयन जारी है।

उद्योग मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में उद्योगों के लिए पर्याप्त तकनीकी मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इसके लिए आईटीआई, पॉलीटेक्निक्स, इंजीनियरिंग कॉलेज, मैंनेजमेंट कॉलेज, वोकेशनल कॉलेज, स्किल डेवलपमेंट कॉलेज आदि संस्थाओं का जाल बिछाया गया है। इन संस्थाओं में लाखों युवा हर साल तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसके साथ ही मध्यप्रदेश में एम्स, आईआईटी, आईआईएम और एनआईटी जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान मौजूद है, जहां बड़ी तादात में युवा तकनीकी कौशल और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। प्रदेश में विशेष इकोनॉमिक जोन और इंडटियल पार्क है जिनमें औद्योगिक विकास का माहौल उपलब्ध है।

ajay dwivedi
the authorajay dwivedi