महायज्ञ में आहुतियां,संतो का दर्शन लाभ ले रहे भक्त

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श्रीश्री 1008 सहस्त्र चंडी महायज्ञ में उमड रही भक्तों की भीड

maqsood afzal

दमोह/सनातन धर्म यज्ञ का बहुत ही बडा महत्व बतलाया गया है प्राचीनकाल से ही आत्मसाक्षात्कार से लेकर स्वर्ग- सुख,बंधन-मुक्ति,मन:शुद्धि,पाप,प्रायश्चित,आत्मबल,ऋद्धि,सिद्धियों आदि के केन्द्र यज्ञ को बतलाया गया है। जिसका वर्णन वेद,पुराणों सहित समस्त धर्म ग्रन्थों में मिलता है। संतो एवं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यज्ञ से प्रसन्न हुये देवता मनुष्य को धन-वैभव,सौभाग्य तथा सुख प्रदान करते हैं। माना जाता है कि जिस कामना से यज्ञ किया जाता है वह तो पूर्ण होती है साथ ही वह ग्राम,नगर एवं क्षेत्र में भी आरोग्यता के साथ ही धनधान्य की वृद्धि होती है। शास्त्रों में वर्णित विभिन्न यज्ञों में से एक श्रीश्री 1008 सहस्त्र चण्डी महायज्ञ का आयोजन इस समय नगर के मध्य मीनाक्षी देवी मंदिर के समीप राजा मैरिज हॉल के प्रांगण में चल रहा है। जहां  मंत्रों की पवित्र ध्वनि से लगातार गुंजायमान परिसर तथा नगर के प्रमुख मार्ग हो रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर यज्ञ वेदी में आहुतियों के रूप से समर्पित की जा रही औषधियों एवं द्रव्यों से सुगंधित तथा आरोग्यता प्रदान करने वाला वातावरण निर्मित हो रहा है।  दस दिनों तक चलने वाले उक्त महायज्ञ में प्रतिदिन निर्धारित समय ब्रम्हमूर्हत से ही जप,पाठ का शुभारंभ हो जाता है। श्रीयंत्र के पूजन के पश्यात् प्रारंभ हुये उक्त सहस्त्र चंडी महायज्ञ में लगातार आहुतियों के साथ मंत्रों के उच्चारण से सम्पूर्ण क्षेत्र धर्म की गंगा में परिवर्तित हो चुका है।
फलों,औषधियों एवं द्रव्यों की आहुतियां-
उक्त महायज्ञ में विभिन्न प्रकार के फलों एवं औषधियों की यज्ञ में आहूतियां दी जा रही हैं। जिसके तहत आंवले , सीताफल ,गन्ना,अनारदाना,वेल,कमलगटा,घृत के साथ विभिन्न प्रकार की आहुतियां दी जा रही हैं।  विदित हो कि सनातन के अनुसार तथा धर्मशास्त्रों में यज्ञ में विभिन्न प्रकार की औषधियों एवं द्रव्यों की आहुतियां देने का विधान बतलाया गया है जिसका धार्मिक एवं वैज्ञानिक रहस्य है।
श्रीवैष्णव कुलभूषण जयजय सरकार एवं वेदांती सियावल्लभ दास-
उक्त महायज्ञ में लगातार संतो की उपस्थिति हो रही है देश के कोने-कोने से जहां राष्ट्रीय स्तर के संतों का आगमन हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर जिले के भी महान संत इस महायज्ञ में उपस्थित हो रहे हैं। इसी क्रम में आज श्रीवैष्णव कुलभूषण वयोवृद्ध अजबदास जी जयजय सरकार फतेपुर एवं न्याय दर्शन,वेदांताचार्य,वेदांती श्रीमंत सियावल्लभ दास जी अयोध्याधाम महायज्ञ में पहुंचे। जहां श्रृद्धालुओं ने संत द्वय के दर्शन के साथ ही उनका आशीष प्राप्त किया। इसी क्रम में खेजरा बजरंगधाम के महंत प्रहलाद दास जी तथा श्रीभगवान ने भी उक्त यज्ञ में उपस्थित होकर भक्तों को आर्शीवाद प्रदान किया। विदित हो कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास की अध्यक्ष राष्ट्रीय संत जन्मेजय शरण जी महाराज,जगदगुरू स्वामी आत्मानंद महाराज,गणेशानंद जी पीठाधीश गजाननपीठ नासिक,महंत मंजुल दास बडा अस्थान अयोध्या एवं हनुमत शक्ति पीठ लखनऊ,महंत प्रहलाद दास जी ने यज्ञ का शुभारंभ किया था।
महायज्ञ को 54 विप्र करा रहे सम्पन्न-
मीडिया प्रभारी पं.डा.लक्ष्मीनारायण वैष्णव ने बतलाया कि उक्त आयोजन 54 विप्र सम्पन्न करा रहे हैं। जिसमें पं.श्रीराम पौराणिक आचार्य,पं.पतिराम तिवारी ब्रम्हा के दायित्व को निभा रहे हैं। जबकि दूसरी ओर 32 विप्र पाठ कर रहे हैं,11 जप,एवं 09 मंडप एवं अन्य व्यवस्थाओं में योगदान दे रहे है। इन्होने बतलाया कि पं.श्रीराम पौराणिक यज्ञाचार्य एवं प.पतिराम तिवारी ब्रम्हा का दायित्व निभा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सेवाभाव परिवार के संयोजक पं.चन्द्रगोपाल पौराणिक सहित पं.रामजी तिवारी,पं.कैलाश प्यासी,पं.रामेश्वर गोस्वामी,पं.नितिन शर्मा,पं.देवेन्द्र दुबे,पं.संतोष तिवारी,पं.पीताम्बर गोस्वामी, पं.रामकुमार अवस्थी,पं.शिवदत्त तिवारी,पं.केशव प्रसाद रावत,पं.संजय नगाइच,पं.देवेन्द्र शास्त्री,पं.ज्वाला प्रसाद तिवारी,पं.हरिशंकर पांडे,पं.राहुल पाठक,पं.अभिषेक शास्त्री,पं.केदारनाथ मिश्रा,पं.सुनील शास्त्री,पं.आशीष कृष्ण शास्त्री,पं.विनोद पांडे,पं.वीरो मिश्रा,पं.उमेश शास्त्री,पं.अमित समदडिया,पं.सत्यम मिश्रा,पं.रामनिरंजन मिश्रा,पं.मनीष वल्लभ,पं.विष्णु प्रसाद दुबे,पं.जागेश्वर शुक्ला,पं.राजेश उपाध्याय,पं.राजेन्द्र सरवरिया,पं.मनीष दुबे,पं.मनीष दुबे,पं.गोपाल शरण रावत,पं.रीतेश मिश्रा,पं.रत्नेश मिश्रा,पं.संजय मिश्रा,पं.सुनील तिवारी,पं.जुगल किशोर तिवारी,पं.हरिशंकर गोस्वामी,पं.विकास तिवारी,पं.बृजेश तिवारी,पं.विजय शास्त्री,पं.राजेश दुबे,पं.नरेन्द्र पाठक,पं.पुरूषोत्तम शुक्ला,पं.अंकित मिश्रा,पं.जागेश मिश्रा,पं.राम दुबे ,पं.दिनेश प्यासी,पं.रामगोपाल गोस्वामी उक्त यज्ञ को सम्पन्न कराने में अपना योगदान दे रहे हैं। परिसर को राजा अग्रवाल द्वारा प्रदान किया गया है जबकि 100 यज्ञमान इसमें बनाये गये हैं। डा.वैष्णव ने बतलाया कि यज्ञ परिसर में प्रतिदिन प्रात:निर्धारित समय से दुर्गा सप्तशती का पाठ,यंत्र पूजन एवं सहस्त्रार्चन होता है।  वहीं मंत्रो के पवित्र उच्चारण के साथ विप्र यज्ञमानों से यज्ञ वेदी में आहुतियां डलवाते हैं। प्रतिदिन कथा,प्रवचन एवं भजनों का लाभ भी भक्तों को प्राप्त होता है।