जिले की खबरेरायसेन

पीएचई के अधिकारी ने दौड़ाए कागजी घोड़े,जिले मेें जल संकट बरकरार

अधिकारी ने ढ़ाई करोड़ की मोटरें खरीद दिया भ्रष्टाचार को बढ़ावा

पानी की किल्लत बनीं मुसीबत-जिले में बढ़ते जलसंकट से निपटने पीएचई के पास नहीं कोई योजना।

amit soni
रायसेन. जिले में दिन ब दिन जलसंकट बढ़ता जा रहा है। हैंडपंप और नल जल योजनाएं बंद हो रही हैं। नदियों का पानी सूख चुका है, कुएं, बावड़ी उपयोग के काबिल नहीं हैं। गांवों में लोग एक-एक बाल्टी पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पीएचई विभाग स्थिति को बहुत गंभीर नहीं मान रहा है। जबकि बुधवार को सिलवानी ब्लॉक के ग्राम साईंखेड़ा में महिलाओं ने खाली बर्तन लेकर राजस्व मंत्री के सामने प्रदर्शन किया। ये हालात बता रहे हैं, कि जिले में पानी का संकट वास्तविक है।
पानी की समस्या को लेकर जिले के तीनो मंत्री, सांसद चिंता जता चुके हैं। कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ  संकट को दूर करने के लिए परेशान हैं, लेकिन संबंधित पीएचई विभाग आंकड़ों की बाजीगरी कर प्रशासन और मंत्रियों को गुमराह कर रहा है। जिले में लगभग १० हजार ७०० हैंडपंपों में से लगभग ७०० हैंडपंप बंद बताए जा रहे हैं। ये आंकड़े असलियत से मेल नहीं खाते। पीएचई के अधिकारी जलसंकट का कारण फसलों की सिंचाई बताकर अपनी कमजोरियों को छिपाने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि जनप्रतिनिधयों को हर दिन जनता का सामना करना पड़ रहा है। कई बार विकट परिस्थतियां खड़ी होने लगी हैं।
ये हैं हालात
जिलेभर में जलसंकट से लोग बेहाल हैं। सैकड़ों गांव ऐेसे हैं, जहां एक भी जल स्रोत जिंदा नहीं है। ग्रामीण कई किमी दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं। गैरतगंज ब्लॉक में ऐसे कई गांव हैं। सिलवानी ब्लॉक में हालात और भी बदहाल हैं, जहां फ्लोराइड के कारण अधिक गहराई वाले हैंडपंपों को बंद कर दिया गया है। जबकि वहां दूसरे अन्य जल स्रोत भी पर्याप्त नहीं हैं। उदयपुरा ब्लॉक के बम्हौरी भुआरी जैसे गांव में दिनभर लोग हाथ ठेलों, साइकिलों से दूर खेतों के नलकूपों से पानी ढो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र ही नहीं बरेली जैसे बड़े नगर में लोग केवल टेंकरों के भरोसे हैं।
राजस्व मंत्री को घेरा महिलाओं ने
ग्राम उदय से भारत उदय अभियान में शामिल होने साईंखेड़ा पहुंचे राजस्व मंत्री को कई महिलाओं ने घेर लिया। उनके हाथ में खाली बर्तन थे। महिलाएं राजस्व मंत्री से पानी की मांग कर रही थीं। यह कोई सामान्य बात नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं एक मंत्री के सामने खाली बर्तन लेकर पहुंच जाएं, इसका यही निष्कर्ष है कि जिम्मेदार अधिकारी उनकी नहीं सुन रहे हैं। वाकई गांवों में जलसंकट बहुत गहरा गया है। इधर अधिकारी एसी रूम में बैठकर बचाव के आंकड़े तैयार करने में लगे हैं।
वर्जन….
पानी का संकट बढऩे का सबसे बड़ा कारण इसका खेती में अधिक उपयोग होना है। इससे जल स्तर में गिरावट हो गई है। अब उन्हें कौन समझाए कि ऐसे तर्क से समस्या का हल नहीं निकलेगा। एसी रूम में बैठकर फर्जी आंकड़े तैयार करने से लोगों की परेशानियां दूर नहीं होंगी। बल्कि मैदान में पहुंचकर पानी क इंतजाम कराने होंगे। तभी कुछ बात बनेगी । सुबोध जैन,पीएचई के ईई

ajay dwivedi
the authorajay dwivedi