अम्बेडकरनगरउ.प्र.

धडल्ले से चल रही डग्गामार बसे, परिवहन विभाग को लगा रही चूना

बस मालिकों के रसूख के आगे हमेशा नतमस्तक हो जाता है प्रशासन

चंद दिनों बंद होने के बाद दोबारा सडकों पर फर्राहटा भरती है प्राइवेट बसे

4manish verma

अम्बेडकरनगर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री के रोक के बाद भी  टाण्डा नगर से लखनऊ जाने वाली डग्गामार बसो की रफ्तार खत्म होने का नाम नहीं ले रही है परिवाहन विभाग के कैबिनेट मंत्री के हस्तक्षेप के बाद भी इन डग्गामार बसों की रफ्तार  थमने का नाम नहीं  ले रही है  डग्गामार बसो के संचालको के ऊचे रसूख व परिवाहन विभाग के अधिकारियो की मिली भगत से चलने वाली इन बसो पर परिवाहन मंत्री की सख्ती का असर अब खत्म हो गया है परिवाहन विभाग के मंत्री का आदेश डग्गामार बसो से होने वाली अवैध कमाई के आगे बेबस हो गया है और यह बसें टाण्डा से लखनऊ राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर धरल्ले से फर्राटा भर रही है  ज्ञात हो की इन डग्गामार बसो की तरफ परिवाहन विभाग के मंत्री व अधिकारयों का ध्यान कई बार  आकर्शित कराया गया जा चुका है लेकिन इसके बावजूद यह डग्गामार बसें धड़ल्ले से बस स्टैण्ड के पास आकर खड़ी होती है और सवारिया भर कर चली जाती है टाण्डा नगर के जुबैर चौराहे को इन डग्गामार बसों के संचालको ने अपना ठिकाना बना रखा है जहां पर यह बकायदा बोर्ड लगा कर अवैध रूप से इन डग्गामार बसों का संचालन करते चले आ रहे है।

टाण्डा नगर से लखनऊ राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर फर्राटा भरने वाली इन डग्गामार बसों पर जहां अब परिवाहन विभाग के मंत्री के हस्तछेप पर इस पर लगाम लगने  उम्मीद थी लेकिन डग्गामार बसों के संचालको के उँचे रसूख परिवाहन मंत्री पर भारी पड़ रहे है। इन डग्गामार बसों के संचालको का रसूख इतना ज्यादा है की कोई भी अधिकारी पिछले कई वर्षो से इन डग्गामार बसों को पूरी तरह रोक पाने में असमर्थ रहा है। इन डग्गामार बसो को रोकने के लिए परिवाहन विभाग के आला अधिकारियो ने कई बार अभियान चलाया लेकिन कुछ दिनों बाद ही यह अभियान इन डग्गामार बसों के संचालको के उंचे रसूख के आगे बंद हो जाता है लेकिन विगत दो दिन पहले परिवाहन विभाग के कैबिनेट मंत्री दुर्गा प्रसाद की पहल से इन डग्गामार बसों के बंद होने की जो उम्मीद थी वह अब खत्म हो चुकी है क्योकि इन डग्गामार बसों के संचालक परिवाहन मंत्री पर भारी पड़ रहे है जिसकी वजह से यह बसें धड़ल्ले से राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर फर्राटा भर रही है  आखिर नियम विरुद्ध विगत कई वर्षो से चल रही यह डग्गामार बसे परिवाहन विभाग के अधिकारियो की मिली भगत से चल है जिसमे सूर्या ट्रेवल्स की बस संख्या यूपी ४२ टी ९०८६ व चौधरी ट्रेवेल्स की  बस यूपी ४५ टी २२६८  मिर्जा ट्रेवेल्स की बस यूपी ४५ ए टी ५२८७  व यूपी ४२ टी ९७२१ व एक अन्य इंटरसिटी ट्रेवेल्स की बस यूपी ४५ टी १५११  जुवेरिया ट्रेवेल्स की बस यूपी ४५ टी २०५५ व तीन अन्य गोल्डन ट्रेवेल्स की बस यूपी ४५ टी १२०३ व एक अन्य के आलावा सरयू एक्सप्रेस  समर ट्रेवल्स  एलिया ट्रेवल्स  सहित लगभग ढेड़  दर्जन बस शामिल है  लेकिन इन बसों के संचालको पर  अधिकारियो द्वारा  कोई कार्यवाही न होना चर्चा का विषय बनी हुई है। टाण्डा नगर के जुबैर चौराहे पर इन डग्गामार बसो के संचालको ने अपना ठिकाना बना रखा है जहांपर बाकायदा आफिस बना कर टाण्डा से लखनऊ के लिए टिकट बुक कराया जाता है और फिर सुबह से ही यह डग्गामार बसें टाण्डा नगर के बस स्टेशन के सामने आ कर लगती और सवारियां भर कर अपने गंतव्य की तरफ चली जाती है। इन डग्गामार बसों के संचालको का रसूख इतना ज्यादा है की यह लोग टाण्डा से लखनऊ चलने वाली परिवाहन विभाग की बसों को चलने नहीं देते और कुछ दिन चलने के बाद यह बसे बंद हो जाती है। इनमे परिवाहन विभाग भी इनका साथ देता है क्योकि इन डग्गामार बसो के चलने से एक तयसुदा रकम प्रति माह परिवाहन विभाग के अधिकारियो के पास पहुंच जाती थी इसके आलावा सबसे खास बात तो यह है की अम्बेडकरनगर जनपद  फैजाबाद जनपद  बाराबंकी जनपद व लखनऊ तक के परिवाहन विभाग के किसी अधिकारी में आजतक इन डग्गामार बसों को रोकने की हिम्मत नहीं आ सकी है  और  परिवाहन विभाग के कैबिनेट मंत्री के आदेश के बावजूद यह डग्गामार बसें टाण्डा से लखनऊ तक का सफर तय कर रही है और इन डग्गामार बसो के संचालको ने जो रकम परिवाहन विभाग के आला अधिकारियो के लिए तय की है उसे कोई भी अधिकारी जाने नहीं देना चाहता यही वजह है की नियमो के विरुद्ध यह डग्गामार बसें धड़ल्ले से नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए टाण्डा से लखनऊ राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर फर्राटा भर रही है इन डग्गामार बसों के चलने से जहां परिवाहन विभाग कंगाल हो रहा है वही इसके आला अधिकारी मालामाल हो रहे है।

ajay dwivedi
the authorajay dwivedi