धर्म

जब तक दर्शन की इच्छा होगी तब तक मिलेगें भगवान – युवराज स्वामी बद्री प्रपन्नाचार्य

गौषाला चौक में श्रीमद् भागवत कथा की बह रही रसधार

IMG-20160427-WA0006 IMG-20160428-WA0012 (1)चित्रकूट, नयागॉव स्थित राजगुरू आचार्य आश्रम के पीठाधीष्वर श्री श्री 1008 स्वामी संकर्षण प्रपन्नाचार्य के परम् षिष्य कृपाप्राप्त श्री श्री 108 बद्री प्रपन्नाचार्य महाराज कथावाचक ने गौषाला चौक पटनहा बगीचा में चल रही भागवत ज्ञान यज्ञ के पॉचवें दिन की कथा में जीव परमात्मा के प्रसंग का वर्णन समझाते हुये कहा कि जब तक जीव में दर्षन की इच्छा रहेगी तब तक भगवान के दर्षन होते रहेगें। परमात्मा से बिछड जाने पर क्लेष प्राप्त होता है और प्राणी के परमात्मा से मिलने पर सुख की अनुभूति होती है। श्रीमद् सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पॉचवें दिन परम् विद्वान कथावाचक युवराज स्वामी ने कृष्णलीला और गोवर्द्धन लीला का प्रसंग सुनाकर भक्तो और षिष्य गणो को भाव विभोर किया। पॉचवें दिन की कथा में महापौर नगर निगम ममता पाण्डेय भी कथा श्रवण हेतु उपस्थित हुई।
पॉचवें दिन की कथा में युवराज स्वामी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओ की कथा का वर्णन किया। माखनचोरी की कथा सुनाते हुये उन्होने कहा कि भगवान मख्खन के साथ भक्तो के मन को भी चुराते थे। कृष्ण के अंदर तो सारा ब्रम्हाड समाया है। अधासुर के वध की कथा का वर्णन करते हुये उन्होने कहा कि पाप को पाप से कभी मुक्ति नही दी जा सकती। जबकि पापी की मुक्ति हो जाती है। नंद बाबा ने कहा कि हम इन्द्र का पूजन करेगें जिससे बारिष होगी। कृष्ण ने कहा कि बाबा इन्द्र बारिष नही कराते है बल्कि हम सब अपने कर्मो के कारण ही फल पाते है। जैसा कर्म करेगें वैसा ही फल मिलेगा। उन्होने गिरिराज पर्वत की पूजा करवाई। जिस पर इन्द्र ने नाराज होकर सात दिनो तक लगातार बारिष कराई और पूरा गोकुल गॉव डूबने लगा। तब भगवान श्रीकृष्ण ने पूरा पर्वत अपनी उंगली पर उठाकर ब्रजवासियो की रक्षा की। ब्यास पीठाधीष्वर युवराज स्वामी बद्री प्रपन्नाचार्य जी ने गोचरण लीला का वर्णन करते हुये धमकासुर का वध बलराम जी द्वारा किये जाने का पं्रसग भी प्रस्तुत किया।

ajay dwivedi
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