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गुरूजी की पुण्यतिथि पर लगा आस्था का मेला

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ब्यावरा/तलेन। चारांे तरफ भीड़, नन्हंे-नन्हंे बच्चे, महिलाए हर दिषा से आ रहे थे। यह नजारा है तलेन में उगल नदी के किनारे स्थित श्री सद्गुरू आश्रम का, जहां जत्रा का आयोजन है निर्वाध 39 सालांे से चल रहा है।
परम् पूज्य गुरूदेव श्री श्री 1008 श्री विष्वम्भरनाथ जी व्यास तलेन के घर घर में पूजे जाते हैं। ऐसा कोई घर नही है जिस घर के पूजा स्थल पर गुरूदेव की तस्वीर न हो। कारण है वर्षांे से चली आ रही आस्था। 1977 में कार्तिक पूर्णिमा के दिन देह विसर्जन करने के बाद गुरूदेव की मान्यता ईष्वरीय रूप में होने लगी। वे सच्चे संत थे। ढोंग ढकोसलों से कोसो दूर थे। जन जन के प्रिय थे। हर किसी के दुख से दुखी होना उनका स्वभाव था। भटके हुओं को राह पर लाना ही उनके लिए वास्तविक धर्म था।
प्रतिवर्ष कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन श्री सद्गुरू आश्रम पर इसी तरह आस्था का मेला लगता आया है। विगत दिन भी आश्रम पर यज्ञ, हवन, पूजन, कीर्तन का कार्यक्रम दिनभर चलता रहा, जिसमें तलेन एवं आसपास के गांव के लोगों ने बड़ी संख्या में सम्मिलित होकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर पूज्य गुरूदेव एवं हनुमान जी महाराज की मूर्ति का विषेष श्रंगार एवं आरती की गई। आयोजित जत्रा में मिठाई, खेल खिलोने , मनीहारी सामानो की दुकाने एवं झुले विषेष आकर्षण का केन्द्र रहे। इस अवसर पर गुरूजी के परिजन भी उपस्थित थे।

ajay dwivedi
the authorajay dwivedi