कैसा रहेगा आपके लिये राहु-केतु का राशि परिवर्तन

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पं. शरद द्विवेदी
पं. शरद द्विवेदी
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कैसा रहेगा आपके लिये राहु-केतु का राशि परिवर्तन

rahu ketuराहु और केतु छाया गृह होने के बाद भी भारतीय ज्योतिष में मुख्य नवग्रह में अपना स्थान रखते है। प्रत्येक डेढ़ वर्ष में इनका गोचर एक राशि से दूसरी राशि में होता है इस माह 29 जनवरी 2016 को 6 बजकर 33 मिनट शाम से राहु सिंह राशि में और केतु कुभ्म राशि में प्रवेश करेंगे। राहु को अंग्रेजी में क्तंहवदे भ्मंक तथा केतु को क्तंहवदे ज्ंपस कहते हैं। पौराणिक कथानकों के अनुसार राहु एक दैत्य था जिसके पिता का नाम राजा विप्रचित एंव माता का नाम सिंहीका (असूया) था। सिंहीका प्रहृाद की बहिन थी । राहु के 100 भाई और एक बहन महिष्मति थी । समुद्र मंथन के समय देवताओं की कतार मे बैठकर अम्रत पान कर रहा था उस समय चन्द्रमा एंव सूर्य ने उसे अमृत पान करते देख लिया था और सभी को बता दिया तत्पशचात विष्णु द्वारा सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया चूकि उसने सिर कटने से पूर्व ही अमृत पान कर लिया था शरीर के दो टुकड़े होने पर उसके मस्तक को राहु और धड़ को केतु कहा गया। सूर्य चन्द्रमा के इस कृत्य से राहु इनके प्रति सुखद भाव नही रखते है।
इस दौरान 11 अगस्त 2016 तक राहु गुरू के साथ रहेगें तथा इस स्थिति में चंाण्डाल योग का निर्मित रहेगा।
क्या है गुरू चाण्डाल योगः-  गुरू राहु का योग होने पर इस योग का निर्माण होता है गुरू पुण्य का कारक है और राहु तामस पृवत्ति वाला अर्थात अध्ंाकार की सज्ञा दी जाती है यदि जातक शुभ प्रारब्ध के कारण सक्षम होगा तो अज्ञान और पाप प्रभाव के कारण शुभ प्रारब्ध के फल को स्थिर नहीं रख पायेगा। जातक में सात्विक भावना में कमी आ जाती  है और वे बुरे खयालात अपने मन में बनाने लगता है।
इनकी गोचरीय स्थिति जातको को अत्याधिक प्रभावित करती हैं। अपनी राशि के अनुसार आप इनके फलों को जान सकते है जिनकी जन्म राशि न हो वे अपने चालू नाम की राशि के आधार पर जान सकते है। गुरू जिस भाव में बैठते है उस भाव के प्रभाव में उदासीनता ला देते है जबकि राहु उस भाव संबध में चुम्बकित्व आकषर्ण पैदा करते है।
राहु के सिंह राशि मे होने पर व्यक्ति दुष्ट स्वभाव का होता है उसके जीवन में कई उतार चढाव होते है छोटी छोटी बातो पर उसे क्रोध आता है जीवन मे उसे छोटी सी भी सफलता मिल जाये तो वह अंहकार में डूब जाता है।

12 राशियों में क्या फल करेगी राहु एंव केतु की स्थितिः-

01.मेष राशिः-  मेष राशि के जातक के पंचम भाव में बैठा राहु मिश्रित फलकारक रहेगा संतान पक्ष की चिता होगी मान-सम्मान रोजी रोजगार में हानि वाद विवाद की स्थिति बनेगी गर्भवती महिलाओं को अपना ख्याल रखना होगा।
वही केतु  मेष राशि के जातक की कुण्डली में एकादस भाव में बैठ कर रोजी रोजगार  एंव व्यापार की उन्नति में सहायक होगें पारिवारिक सुख में बृद्धि लायेगा।
02.वृष राशिः- इस राशि के जातक की कुण्डली में चौथे भाव मेे बैठा राहु कुछ खास सफलता नही देता प्रियजनों से कष्ट का अनुभव होगा व्यापार रोजगार में बाधाएं आयेगी वाद विवाद की स्थिति पैदा होगी।
जबकी केतु जातक की कुण्डली में दसवें भाव में बैठ कर मनोबल बढायेगें सामाजिक मानसम्मान बढेगा रोजगार के अवसर आयेगे।
03. मिथुन राशिः- जिस राशि के जातक की कुण्डली में तीसरे भाव पर बैठे राहु शुभफलकारक रहेंगे।नौकरी हेतु चल रहा प्रयास सार्थक होगा मानसिक चिन्ता से मुक्ति मिलेगी मन प्रसन्न रहेगा। पारिवारिक जनो से सहयोग प्राप्त होगा।
मिथुन के जातक की कुण्डली मेेें केतु की स्थिति  नवंे भाव में जहां एक ओर प्रतियोगी परिक्षाओं में सफलता दिलायेगी वही कोर्ट कचेहरी के मामलों में बाधा उत्पनन करेगी।
04. कर्क राशिः-  जातक की कुण्डली में द्वितीयस्थ राहु अशुभफालकर रहेगी वाणी  पर संयम बरतनी होगी  धन की कमी के कारण व्यय में कमी आयेगी लोन बढेगाद अपने की धोखा दे सकते है दायी आंख का विशेष ध्यान होगा।
केतु की स्थिति कुण्डली में अष्ठम होने के कारण शारीरिक कष्ट होने के आसार बनेगें आये के संसाधनों में कमी आयेगी।
05. सिंह राशि:- लग्न में ही बैठे राहु मानसिक स्थिति कमजोर करेंगे वाद विवाद से बचना होगा सम्मान पर ठेस पहुचेगी।
ंिसह  राशि के जातक की कुण्डली में सप्तम भाव पर बैठे केतु पत्नी कष्ट दे सकते है व्यापार की स्थिति कमजोर हो सकती है विरोधी परास्त करने की स्थिति में रहेगे।
06. कन्या राशिः- द्वादश भाव में बैठे राहु कठोर शब्दों का प्रयोग करा संबध खराब कर देगी धन की कमी लेन देन की चिता पारिवारिक चिन्ता बढने की स्थिति रहेगी।
वही षष्ठस्थ केतु शंभफलकारक है सुख सम्पन्न बनाने में सहायक रहेगंे।
07. तुला राशिः-़  एकादश भाव मंे बैठे राहु तुला राशि के लिये लाभदायक रहेगें पारिवारिक समाजिक मानसम्मान मे वुद्धि होगी नये रोजगार के अवसर मिलेगें। जातक कि कुण्डली में पचम भाव में बैठे केतु मेहनत अधिक करायेगें।
08. वृश्चिक राशिः- इस राशि के जातक की कुण्डली में दश्मस्थ राहु मनोकामाना पूरी करने वाले रहेंगे राजनैतिक लाभ मिलेगा पदोन्नति के अवसर आयेगें,सुख मान सम्मान बढेगा मित्रो एंव अपने सगे संबधी का सहयोग प्राप्त होगा।
लेकिन जातक की कुण्डली में चौथे भाव पर बैठे केतु  मानसिक कष्ट देगा और पारिश्रम अधिक करायेगा।
09. धनु राशिः-  नवमस्थ राहु भाग दौड़ करायेगा विदेश यात्रा में बाधा आयेगी शत्रु संगठित होगा आय के स्त्रोतों में कमी के आसार बनेगें।  लेकिन वही पर केतु समजस्य बनाये रखेगा मानसम्मान दिलायेगा सभी लोगों का सहयोगा प्राप्त होगा।
10.मकर राशिः- अष्ठमस्त राहु अशुभफलकार है धन में कमी वाद विवाद से बचना होगा भाइयो से विवाद की स्थिति बनेगी रोजी रोजगार मे बाधायें आ सकती है।
द्वितीय भाव का केतु धार्मिक कार्य में रूचि पैदा करेगे  लकिन वाणी पर संयम रखना होगा।
11. कुभ्म राशिः- सप्तम भाव पर बैठे राहु व्यापार की गति में रूकावट पैदा करेगा अनचाहे कार्यो से कष्ट होगा पत्नी को रोग से कष्ट होगा मन खिन्न रह सकता है । क्ेतु की स्थिति के कारण अपने द्वारा किये गये कार्यो से ही आप असन्तुष्ट रहेगे ।
12- मीन राशिः-  मीन राशि के जातक की कुण्डली में षष्ठम भाव पर बैठे राहु आकस्मिक  लाभ दे सकते है  शत्रु को मुह तोड़ जबाब मिलेगा शुभ समाचार प्राप्त होगें। रोजीरोजगार की लाभ में वुद्धि होगी।
जातक की कुण्डली मे केतु की स्थिति धार्मिक यात्राओ की ओर आकर्षित करेगा लेकिन पेट पैर के रोगो से अनजान न रहें।
राहु दोष के उपाय:- रात को सोते समय सिरहने एक सिक्का रखकर सोये और सुबह उठकर किसी सफाई कर्मी को दान कर दें। बजनी चॉदी का कड़ा बाये हाथ में धारण करें। एक अन्जुरी लकड़ी का कोयला ले कर शनिवार के दिन बहती दरिया में प्रवाहित करें। अनाथ कन्या को गोद ले राहु कष्ट से मुक्ति अवश्य मिलेगी।
केतु दोष के उपायः-  श्री गणेश की उपासना करें। लहसुनिया के गणेश लाकेट  में धारण करें। घर या बगीचे मे नीम के वृक्ष लगाने से भी मिलेगी केतु कष्ट से मुक्ति काले सफेद तिल  जल में  मिलाकर  कर पीपल के वृक्ष को नहलाये। काला कम्बल दान करें।