गुनाजिले की खबरे

इंटरनेट पर देख सकेंगे खसरा नकल व खेत का नक्शा

naveen modinaveen modi

गुना। जिले सहित प्रदेशभर के लाखों किसानों की खाता-खसरा और भूमि के नक्शे डिजिटाइजेशन का काम लगभग पूरा हो गया है। डिजिटल नक्शे बनने के बाद भू-अभिलेख विभाग ने इन्हें अपनी आधिकारिक वेबसाइड पर डाल दिए हैं। अब किसान अपने गांव,घर में ही इंटरनेट के माध्यम से अपनी जमींन का खाता, खसरा और नक्शा देख सकते हैं। गांव की सरकारी जमीन, नदी, तालाब, पहाड़ की जानकारियां भी उसमें अपडेट कर दी गई है। जरूरत पडऩे पर प्रिंटआउट भी निकाला जा सकता है, हालांकि न्यायालयीन कार्य में आवश्यक होने पर यह प्रिंटेड नकल काम नहीं आएगी। उसके लिए सत्यापित प्रति तहसील कार्यालय से ही प्राप्त करनरा पडग़ी। भू-अभिलेख कार्यालय के अनुसार जिले में तकरीबन 1400 गांव है जिनमें से करीब 1500 गांवों का ब्योरा वेबसाइड पर ऑनलाईन किया जा चुका है। शेष कार्य अंतिम चरण में है जिन गांवों के नक्शे उपलब्ध नहीं हुए हैं, वहां सिर्फ जानकारी डाली जाएगी।



न्यायालय में साक्ष्य नहीं माना जाएगा
भू-अभिलेख के उच्चाधिकारियों ने साफ कर दिया है कि उक्त ऑनलाईन खसरा या नक्शा प्रतिलिपी को किसी न्यायालय में साक्ष्य के लिए प्रस्तुत नही किया जा सकता। यह सिर्फ किसान/प्रार्थी की व्यक्तिगत जानकारी सुविधा के लिए है इसमें संशोधन कराने या सत्य प्रतिलिपि के लिए संबंधित तहसील कार्यालय में संपर्क करना होगा।

दरवाजे से बाहर हुए स्कूल बसों के नियम
गुना। प्राइवेट स्कूलों की बसों के नियम विरूद्व चलने के कारण हादसे हो रहे हैं। हाल ही में अंबाह के दो स्कूलों की बसें हादसों का शिकार हुई, जिनमें एक छात्र व एक छात्रा की मौत हो गई, जबकि कई बच्चे घायल हुए। बावजूद इसके स्कूल संचालकों ने बसों के मामलें में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित गाइड लाइन का पूरी तरह पालन करना शुरू नही किया है। स्कूल बसों के संचालन के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई गाइड लाइन का पालन जिले के अधिकतर शिक्षा संस्थान नहींं कर रहे हैं। बसों की फिटनेस साल में एक बार चेक करा ली जाती है, लेकिन इनकी रिटेयरिंग, ब्रेक व क्लच आदि गड़बड़ रहती है, जिससे हादसे हेाते हैं।

डिलेवरी के वक्त तौलकर सिलेण्डर देना जरूरी
गुना। कहीं आपको घरेलू गैस सिलेण्डर में गैस कम तो नहीं दी जा रही है, इसकी जांच करना आपका अधिकार है। हालांकि गैस एजेसियों की लापरवाही के कारण उपभोक्ता ऐसा नहीं कर पा रहे हैं और गाहे-बगाहे ठगी का शिकार होते रहेते हैं। घरेलू सिलेंडर मेें किलोह 200 ग्राम गैस होना जरूरी है। सरकार ने गैर सिलेंडर तौलकर देने के लिए छह महीने पहले कानून में संशोधन कर दिया है। गैस एजेंसी संचालक इसे लागू करने से बच रहे हैं। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने विधिक माप विज्ञान अधिनियम 2011 पैकेट में रखी वस्तुएं में संशोधन कर ये प्रावधान किया है कि सिलेंडर तौलकर लेना उपभोक्ता का अधिकार है। राज्य सरकार तक आदेश पहुंचने के बाद भी सिलेंडर तौलकर नहीं दिए जा रहे। छह माह पहले बने नियम अनुसार सिलेंडर वजन तौलकर देना होगा। लेकिन इसका अमल नहीं हो रहा है। घरेलू गैस सिलेंडर देेते समय वजन संबंधी शंका होने पर आपत्ति दर्ज कराएं। गैंस एजेंसी के हॉकर को मौके पर सिलेंडर का तौल करना होगा। इंकार करे तो सीधे नापतौल निरीक्षक या जिला खाद्य व आपूर्ति नियंत्रक के दफ्तर शिकायत कर सकते हैं।



 हॉकर्स को तौल यंत्र रखना जरूरी
कानून में हुए संशोधन के अनुसार गैस एजेंसी संचालकों व हॉकर्स को 50 किलों क्षमता का ऐसा यंत्र रखना जरूरी है जो 10ग्राम तक सटीक वजन बता सके । तौलकंाटा इलेक्ट्रोनिक या मैकेनिकल हो सकता है। केंद्र सरकार ने 6 माह पहले नियमों में प्रावधान किया लेकिन अब तक नाप तौल अमले, ऑयल कंपनियों और गैस एजेंसी संचालकों ने उपभोक्ता जागरूकता का कोई प्रयास नहीं किया। नापतौल अमले को तो फुर्सत ही नहीं मिली कि वह एजेंसी पर जाकर पता करे तो ऐसा कोई तौल कांटा भी है या नहीं।
किसी भी ऑयल कंपनी के भरे हुए गैस सिलेंडर में गैस की मात्रा 14 किलों 200 ग्राम हेाना चाहिए। खाली सिलेंडर का वजन 15 किलो से साढ़े 16 किलोग्राम तक होता है। सिलेंडर के ऊपरी हिस्से पर वजन लिखा होता है आपको सिलेंडर के वजन पर संदेश हो तो डिलीवरी बाय से उसे तोलने का कह सकते हैं। खाली सिलेंडर का वजन 16 किलो हुआ तो आपके भरे हुए सिलेंडर का वजन 30 किलो 200 ग्राम होगा। इससे कम वजन हुुआ तो आप शिकायत कर सकते हैं।

ajay dwivedi
the authorajay dwivedi