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अद्भुत पुरावशेष उगल रहा मनौरा पहाड़

1600 वर्ष पुरानी सभ्यता व संस्कृति के मिल रहे प्रमाण

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ajay tripathi

जिला मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर कैमोर पर्वत श्रृंखला के ग्राम मनौरा की पहाडिय़ों में गुप्त कालीन अवशेष पुरातत्व विभाग के टीम को मिले हैं। खुदाई के दौरान जहां मंदिर, शिवलिंग, प्रचीन मूर्तियों व मिट्टी के बर्तनों के अवशेष मिले हैं वहीं लबालब तालाब, कुएं, बाबली के अलावा विशाल गुफा के ऊपर टेकरी में भगवान विष्णु व लक्ष्मी जी की चतुर्भुजी मूर्तियां मिली हैं। पुरातत्व विभाग की टीम को संपूर्ण जानकारी के लिए पांच वर्ष का समय लग जाएगा।
कटनी। कैमोर पर्वत श्रृंखला के बीच पहाड़ पर स्थित ग्राम मनौरा में सर्वेक्षण कार्य के दौरान पुरातत्व विभाग को गुप्तकालीन समय के मंदिरों के अवशेष प्राप्त होने के संकेत मिले। जिस पर विगत दिनों पुरातत्व विभाग द्वारा सक्रियता पूर्वक 78 टीलों को चिन्हित कर उन्ही में से पूर्व पर स्थित एक टीले की खुदाई का कार्य प्रारंभ किया है। खुदाई के दौरान लगभग 3 फीट ऊंचा शिवलिंग,मंदिर के स्तंम्भ,शंकर पार्वती की मूर्तियां प्राप्त हुई हैं।
वैदिक युग की वेदी मिली
मनौरा में पुरातत्व विभाग द्वारा कराए जा रहे उत्खनन के दौरान 1600 वर्ष पुरानी दुर्लभ वास्तुकला से निर्मित यज्ञ वेदी हवन कुंड मिला हैै। पुरातत्व विभाग रानी दुर्गावती संग्रहालय जबलपुर के संचालक एमके माहेश्वरी ने बातचीत के दौरान बताया कि शिवमंदिर के आग्नेय कोण में 7 फिट की गहराई में स्थित यज्ञ वेदी प्राचीन वास्तुकला से परिपूर्ण हैै। इसकी बनावट व प्राचीनता के संबंध में विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के शोधार्थी भी पहुंच चुके है जो यज्ञ शाला व यज्ञ वेदी के संबंध में शीघ्र ही अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
एक हजार फिट ऊंचाई पर बसा है मनौरा
कैमोर पर्वत श्रृंखला पर स्थित मनौरा गांव लगभग एक हजार फिट की ऊंचाई पर बसा हैै। जहां लबालब भरा तालाब, कुएं एवं पांच मीटर गहरी बावली सदा पानी से भरे रहने का प्रमाण दे रहे हैै। लोगों ने बताया कि कभी तालाब या बावली का जल नहीं सूखता। आदिवासी व जनजाति समुदाय के करीब सैकड़ा भर लोग यहां वर्षों से निवासरत हैं और आज भी प्राचीन सभ्यताा में अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं यहां से कोसो दूर हैं।
प्रारंंभिक चरण में ही मिले प्राचीन अवशेष
मनौरा गांव का यह हिस्सा 1600 वर्ष पुरानी सभ्यता व संस्कृति का प्रमाण दे रहा है। पुरातत्व द्वारा की गई प्रारंभिक चरण की खुदाई में ही प्राचीन अवशेषों की प्राप्ति स्वयं में एक उपलब्धि है। भगवान विष्णु की चर्तुभुजी मूर्तियां, शिवंलंग, मिट्टी के बर्तनों के अवशेष, मंदिरों के शिला स्तंभ के अलावा उत्तरी टीले पर एक चौपड़ा (छोटा तालाब) भी प्राप्त हुआ है।
78 टीलों की होगी खुदाई
पुरातत्व विभाग के पी के लोखंडे उत्खनन डायरेक्टर, एम के महेश्वरी, पीसी महोबिया, अशोक त्यागी सर्वेक्षक, सुधीर रार्बट, पी के राव कैंप सहयोगी हैं। इस संबंध में सुरेश वर्मा ने बताया कि अभी 78 टीलों की खुदाई की जानी है। खुदाई के दौरान और भी प्राचीन धरोहरों के प्राप्त होने के संकेत हैै। इस स्थान पर 108 शिवलिंग होने के प्रमाण पाए गए हैं। साथ ही यहां घुड़साल होने के भी संकेत मिले हैं।
कठिनाई भरा सफर
आवागमन की दुर्गमता व बिजली की समस्या से पुरातत्व विभाग के कर्मचारियों को भारी तकलीफों का समाना करना पड़ रहा है। जहां एक ओर एक हजार फिट की ऊंचाई पर बसे मनौरा गांव तक आने जाने का रास्ता दुर्गम व कष्टï भरा है। वहीं विद्युत मंडल द्वारा गांव की बिजली काट देने से विभाग को अपने कार्य में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार को भेजी जाएगी रिपोर्ट
चार किमी. के क्षेत्र पर बिखरे अवशेषों को चिन्हित कर इनकी विस्तृत रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी जाएगी। विशाल शिव मंदिर के उत्खनन व अद्भुत वास्तु शैली का परीक्षण पुरातत्व विभाग द्वारा किया जा रहा हैै। इस पूरे प्रोजेक्ट में करीब पांच वर्ष लगने की संभावना जताई गई है।
देश स्तर की पहली उपलब्धि
जानकारी में पुरातत्व विभाग के अधिकारी द्वारा बताया गया कि सिंधू घाटी सभ्यता के बाद यह देश स्तर की पहली उपलब्धि है। देश स्तर का यह पहला स्थान है, जहां इतने विस्तृत क्षेत्र में मदिरों व देवताओं के अवशेष प्राप्त हुए हैं। स्थानीय बुर्जगों के अनुसार मनौरा को बाणासुर की राजधानी सुर्णितपुर माना जा रहा है। पहाड़ी पर स्थित लंबी गुफा की भी खुदाई व सफाई का कार्य किया जाना है।

ajay dwivedi
the authorajay dwivedi